Nitya Niyam - Nangli Darbar
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अखंड ज्ञान स्वरुप, निर्मल मनुष्य आकृति साक्षात परमात्मा जिनके मस्तक पर रत्न-जड़ित श्वेत मुकुट तथा श्वेत वस्त्रों से सुशोभित और मोतियों की माला से विशेष विभूषित हृदय सिंहासन पर विराजमान, भक्तों को वरदान देने वाले, प्रसन्न है मुखारविंद जिनका ऐसे जो श्री सद्गुरु है, तिनको मैं नमस्कार करता हूँ।
प्रणाम! तुझे श्री परमहंस दयाल। मोरी पल-पल, छिन-छिन कर सम्भाल॥
ॐ जय श्री जगतारण
औगनहार की बेनती सुनो गरीब निवाज। जे मैं पूत कपूत हूँ, मेरी बहुड़ पिता को लाज॥
जै सत् चित्त आनन्द मूर्ति, स्वामी जी के चरण वन्दन। जो दे उपदेश कलेश नाशे, कलू के कलिश विभंजन॥
- Shri Paramhans Dayal Ji Ki Chhand-StutiNitya Niyam - Nangli DarbarAdvaitanand Ji (Paramhans Dayal Ji)
स्वामी जी मेरे परमहंस महाराज विद्या सागर परमानन्द॥
गुरु की मूरत मन में ध्यान। गुरु के शब्द मन्तर मनमान॥
अंग-संग सतगुरु-सतगुरु-सतगुरु, सारे बोलो सतगुरु जी।
कोटि-कोटि मम वन्दना, कोटि-कोटि प्रणाम, आदि ब्रह्म पूर्ण पुरुष, श्री सत्गुरु सुख धाम।